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शर्करा प्रभाग

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31.01.2016 को इस समय देश में लगभग 330 लाख मैट्रिक टन चीनी उत्‍पादन की पर्याप्‍त पेराई की क्षमता के साथ 716 चीनी मिलें स्‍थापित हैं। इस क्षमता को सरसरी तौर पर निजी क्षेत्र की तथा सहकारिता क्षेत्र की यूनिटों में बराबर विभाजित किया गया।

कुल मिलाकर, चीनी मिलों की क्षमता 2500 टीसीडी से 5000 टीसीडी है लेकिन इसमें तेजी से वृद्धि हो रही है तथा यह क्षमता 10000 टीसीडी को पार कर रही है। दो आधुनिक रिफाइनरीज भी देश में गुजरात तथा पश्‍चिम बंगाल के तटवर्ती क्षेत्रों में स्‍थापित की गई हैं। ये रिफाइनरियां मुख्‍यतया आयातित कच्‍ची चीनी से रिफाइंड चीनी तथा घरेलू कच्‍ची चीनी से रिफाइंड चीनी का उत्‍पादन करती हैं। देश में चीनी मिलों का क्षेत्रवार ब्‍यौरा इस प्रकार है:-

क्र. सं. क्षेत्र फैक्ट्रियों की संख्या
1 सहकारी 326
2 निजी 347
3 सार्वजनिक 43
कुल 716*

* इसमें पश्चिोम बंगाल और गुजरात में स्थिात एक-एक रिफाइनरी शामिल है।

गन्ना मूल्य बकाया

यद्यपि चीनी मिलों द्वारा गन्‍ना किसानों को भुगतान विभिन्‍न कानूनी प्रक्रियाओं और राज्‍य सरकारों द्वारा लागू नियमों के माध्‍यम से घरेलू बाजार मूल्‍य की गतिशीलता तथा निर्यात संभावनाओं से संबंधित अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍थिति द्वारा प्रभावित होता है। इसके अतिरिक्‍त देश में चीनी का उत्‍पादन पिछले दो कृषि मौसमों से घरेलू आवश्‍यकता से कहीं अधिक हो रहा है और यह आशा की जाती है वर्ष 2015-16 के दौरान भी इसका उत्‍पादन घरेलू आवश्‍यकता की पूर्ति के लिए पर्याप्‍त होगा। चीनी के अधिक उत्‍पादन के कारण घरेलू बाजार में चीनी के मूल्‍यों में मंदी आई है जिसकी वजह से गन्‍ना किसानों के गन्‍ना देयों का समय पर भुगतान करने में चीनी मिलों की नकदी की स्‍थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इसके परिणामस्‍वरूप, सरकार ने चीनी मिलों की नकदी को बढ़ाने के लिए विभिन्‍न स्‍कीमों को कार्यान्‍वित किया ताकि इन मौसमों के दौरान गन्‍ना मूल्‍य बकायों को न्‍यूनतम रखा जा सके।

पिछले कुछ चीनी मौसमों के लिए एक ही निर्धारित तारीख को गन्‍ने के मूल्‍य के भुगतान तथा बकाया का विवरण इस प्रकार है:

(करोड़ रूपए में)

मौसम निम्न तारीख को स्थिति कुल देय मूल्य अदा किया गया कुल मूल्य बकाया देय मूल्यू पर बकाया का %
2015-16 15/03/2016 45301.91 30962.78 14339.13 31.65
2014-15 15/03/2015 48710.67 30460.90 18249.77 37.47
2013-14 15/03/2014 43747.18 25312.13 18435.05 42.14
2012-13 15/03/2013 48585.22 36278.97 12306.25 25.33
2011-12 15/03/2012 40125.05 31207.02 8918.03 22.23
2010-11 15/03/2011 33488.72 28960.45 4528.27 13.52

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में चीनी के वितरण की नई प्रणाली

केन्‍द्रीय सरकार ने चीनी मिलों पर लेवी देयता समाप्‍त करके और खुले बाजार में चीनी की बिक्री संबंधी विनियमन रिलीज व्‍यवस्‍था समाप्‍त करके चीनी उद्योग को आंशिक रूप से नियंत्रण मुक्‍त कर दिया है। इससे पहले, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की मांग को पूरा करने के लिए, चीनी मिलों के लिए अपने उत्‍पादन की 10% मात्रा की आपूर्ति करना अनिवार्य था। अब चीनी मिलें अपना पूरा उत्‍पादन अपने वाणिज्‍यिक विवेक के अनुसार बेचने के लिए स्‍वतंत्र हैं। तथापि, नई व्‍यवस्‍था के अधीन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली में 13.50 रुपये प्रति किलो ग्राम के मौजूदा खुदरा निर्गम मूल्‍य पर चीनी उपलब्‍ध कराने के लिए, राज्‍य सरकारों/संघ राज्‍य क्षेत्रों के प्रशासनों से पारदर्शी प्रणाली के जरिये खुले बाजार से चीनी खरीदने के लिए कहा गया है। केन्‍द्रीय सरकार राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों को उनके मौजूदा आबंटनों पर आधारित मात्रा की सीमा तक 18.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्रतिपूर्ति कर रही है। हाल ही में केन्‍द्रीय सरकार ने राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्र को यह छूट दी है कि आवाजाही और डीलरों की कमीशन पर लगने वाली अतिरिक्‍त लागत यदि कोई हो को, या तो स्‍वयं पूरा कर दें या खुदरा निर्गम मूल्‍य में शामिल करके इसे उपभोक्‍ताओं पर डालें।

इसके अलावा, राज्‍य सरकारों के वित्‍तीय बोझ को कम करने की दृष्‍टि से सरकार उन सभी राज्‍य सरकारों को जिन्‍होंने इसके लिए केन्‍द्रीय सरकार से अनुरोध किया है, को अग्रिम सब्‍सिडी प्रदान कर रही है।

चीनी की खुले बाजार से खरीद की नई प्रणाली को 30 राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा जून, 13 से अपना लिया गया है। चालू वित्‍तीय वर्ष 2015-16 के दौरान 4500 करोड़ रूपए की राशि राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्रों को जारी करने के लिए उपलब्‍ध कराई गई है।

चीनी का उत्पादन, खपत और स्टाक

चीनी का उत्पादन

भारत में चीनी का उत्‍पादन चक्रीय प्रकृति का है। प्रत्‍येक 2-3 वर्ष में चीनी का अधिकतम उत्‍पादन होता है तो फिर अगले दो-तीन वर्षों में चीनी का कम उत्‍पादन होता है। चीनी मौसम 2010-11 से देश में चीनी का उत्‍पादन घरेलू आवश्‍यकताओं से आगे बढ़ गया है। इस प्रकार यह प्रतीत होता है कि चीनी के उत्‍पादन की चक्रीयता में गिरावट आई है। 2010-11 से मौसम-वार चीनी का उत्‍पादन नीचे दिया गया है:-

चीनी मौसम(अक्तूबर-सितम्बर) चीनी का उत्पादन(मात्रा लाख टन में)
2010-11 243.50
2011-12 263.43
2012-13 251.83*
2013-14(अ) 245.54
2014-15(अ) 284.63

* इसमें आयातित कच्‍ची चीनी से उत्‍पादित 6.76 लाख टन श्‍वेत चीनी शामिल नहीं है।
(अ)-अनन्तिम

चीनी का अंतिम स्टाक

प्रत्‍येक चीनी मौसम 2010-11 से 2014-15 के अंत में चीनी का अंतिम स्‍टाक नीचे दिया गया है:-

(मात्रा लाख टनों में)

चीनी मौसम अंतिम स्टाक
2010-11 58.19
2011-12 66.96
2012-13 91.09
2013-14 72.13
2014-15(अ) 88.76

अ- अनन्तिम

कृषि और सहकारिता विभाग द्वारा जारी तथा प्रमुख चीनी उत्‍पादक राज्‍यों के गन्‍ना आयुक्‍तों से प्राप्‍त सूचना पर आधारित गन्‍ना उत्‍पादन आंकड़ों के अनुसार चालू चीनी मौसम 2015-16 के दौरान चीनी का उत्‍पादन अनंतिम तौर पर लगभग 255.00 लाख टन होने का अनुमान है। पिछले पांच मौसमों का पिछला अधिशेष स्‍टाक, उत्‍पादन, आयात, उपलब्‍धता, अनुमानित आंतरिक खपत, अंतशेष स्‍टाक का ब्‍यौंरा नीचे दिया गया है:-

2010-11 चीनी मौसम से चीनी बैलेंस शीट

(मात्रा लाख टन में)

विवरण 2010-11 2011-12 2012-13 2013-14 (पी) 2014-15 (प्रक्षेपित)
पिछले मौसम से चीनी मिलों के पास अग्रेनित स्‍टाक 51.25 62.96 66.96 91.09

72.13
घटा 5% समायोजित 2.56 - 0.95 - -
2010-11 निर्यात मात्रा ओजीएल -3 के लिए स्‍टाक (अनुमत लेकिन सितम्‍बर 11 के बाद निर्यातित) - 4.42 - - -
कुल प्रारंभिक स्‍टाक 48.69 58.54 66.01 91.09 72.13
चीनी का उत्‍पादन 243.50 263.43 258.58# 245.54 284.63
आयात - - 6.76 1.05 -
कुल अनुमानित उपलब्‍धता 292.19 321.97 324.59 337.68 356.76
अनुमानित निर्गम/ आंतरिक खपत के लिए प्रेषण 208 227.25 230.00 243.00 256.00
एएलएस/एएस बाध्‍यता और ओजीएल के प्रति निर्यात 26 27.76 3.5 22.55 12.00
घरेलू कच्‍ची सामग्री का प्रेषण - - - - -
कुल अनुमानित रिलीज/प्रेषण 234 255.01 233.50 265.55 268.00
मौसम के अंत में चीनी मिलों के पास अनुमानित अंतिम स्‍टाक 58.19* 66.96 91.09 72.13** 88.76

पी-अनंतिम
# 251.83 लाख मी.टन श्‍वेत चीनी और आयातित कच्‍ची चीनी से उत्‍पादित 6.76 लाख मी0 श्‍वेत चीनी शामिल है।
* एक मौसम का अंतिम स्‍टाक क्षतिग्रस्‍त/गीली चीनी, न्‍यायालय के आदेश के प्रति बेची गई चीनी के कारण दूसरे मौसम का प्रारंभिक स्टाक भिन्‍न होता है।
** ललगभग 0.60 लाख टन बी आई एस एस/ब्राउन चीनी जो बिक्री योग्‍य नहीं है, स्‍टाक में शामिल नहीं है।

गैर-लेवी चीनी के मिल-पूर्व और खुदरा मूल्यं

वर्तमान चीनी मौसम 2014-15 के दौरान घरेलू बाजार में चीनी के खुदरा मूल्‍य स्‍थिर रहे हैं। 2009-10 से 2015-16 (नवम्‍बर, 2015 तक) चीनी मौसमों के दौरान देश के प्रमुख केन्‍द्रों पर गैर-लेवी चीनी (एस-30 ग्रेड) के मूल्‍यों की सीमा निम्‍न प्रकार रही:-

चीनी मौसम (अक्तू्.–सित.) *चीनी के मिल-पूर्व मूल्यों की सीमा (रूपए प्रति क्विंटल) **चीनी के खुदरा मूल्यप की सीमा (रूपए प्रति किग्रा.)
2011-12 2540-3735 31.17-43.70
2012-13 2810-3685 32.74-41.00
2013-14 2420-3300 31.00-36.00
2014-15 2050-2860 29.35-35.87
2015-16 (मार्च, 2016 तक ) 2350-3500 30.55-34.64

स्रोत: * डेली ट्रेड मार्क इन्‍क्‍वारी, शर्करा निदेशालय
** मूल्‍य निगरानी प्रकोष्‍ठ, उपभोक्‍ता मामले विभाग

चीनी का निर्यात

दिनांक 15.01.1997 तक चीनी का निर्यात अधिसूचित भारतीय निर्यात एजेंसियों नामत: भारतीय चीनी एवं सामान्‍य उद्योग निर्यात-आयात निगम लिमिटेड (आई एस जी आई ई आई सी) तथा भारतीय राज्‍य व्‍यापार निगम लिमिटेड (एस टी सी) के माध्‍यम से चीनी निर्यात संवर्धन अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के अंतर्गत किया जा रहा था। एक अध्‍यादेश के जरिये चीनी नियात संवर्द्धन अधिनियम, 1958 को 15 जनवरी, 1997 से निरस्‍त कर दिया गया था और इस प्रकार चीनी का निर्यात सारणी से हटा दिया गया था। सारणी से हटाने की व्‍यवस्‍था के अधीन, चीनी का निर्यात वाणिज्‍य मंत्रालय के अधीन कृषि तथा प्रसंस्‍कृत खाद्य उत्‍पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (अपेडा) के माध्‍यम से किया जा रहा था। उसके बाद विभिन्‍न चीनी मिलों/व्‍यापारी निर्यातकों द्वारा शर्करा निदेशालय से निर्यात रिलीज आदेश प्राप्‍त करने के पश्‍चात चीनी का निर्यात किया गया।

2006-07 और 2007-08 के चीनी मौसमों के अधिशेष चरण के दौरान, दिनांक 31.07.2007 की अधिसूचना द्वारा रिलीज आदेशों के बिना चीनी का निर्यात करने की अनुमति दी गई। तत्‍पश्‍चात्, 01.01.2009 से रिलीज आदेश प्राप्‍त करने की आवश्‍यकता को पुन: लागू किया गया क्‍योंकि देश में चीनी के उत्‍पादन में कमी होने के रूझान मिल रहे थे। 2010-11 और 2011-12 (मई, 2012 तक) के चीनी मौसमों के दौरान, घरेलू खपत से अधिक चीनी के उत्‍पादन को ध्‍यान में रखते हुए रिलीज आदेशों पर खुले सामान्य लाइसेंस (ओजीएल) के अधीन चीनी का निर्यात करने की अनुमति दी गई। उसके बाद, सरकार ने दिनांक 11.05.2012 की अधिसूचना संख्‍या 1059(ई) द्वारा निर्यात रिलीज आदेश प्राप्‍त करने की आवश्‍यकता समाप्‍त कर दी। चीनी का निर्यात अब विदेश व्‍यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के पास मात्रा का पूर्व पंजीकरण से मुक्‍त विषय हो गया है।

चीनी का आयात

चीनी का आयात जिसे मार्च, 1994 में बिना शुल्‍क के खुले सामान्य लाइसेंस (ओजीएल) के अधीन रखा गया था, 27.04.1998 तक बिना सीमा शुल्‍क के जारी रहा। सरकार ने 28 अप्रैल, 1998 से आयात की गई चीनी पर 5 प्रतिशत मूल सीमा शुल्‍क और 850/- रुपये प्रति टन की दर से प्रतिशुल्‍क लगाया। प्रतिशुल्‍क के अतिरिक्‍त, 14.1.1999 से मूल सीमा शुल्‍क 5 प्रतिशत से बढ़ा कर 20 प्रतिशत कर दिया गया। वर्ष 1999-2000 के केन्‍द्रीय बजट में, आयात की गई चीनी पर शुल्‍क 20 प्रतिशत से और बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया था और इस पर 10 प्रतिशत अधिभार लगा दिया गया था। चीनी के आयात पर सीमा शुल्‍क पुन: बढ़ाकर 30.12.1999 को 40 प्रतिशत और 9.2.2000 को 60 प्रतिशत कर दिया गया और इसके साथ 950 रुपये प्रति टन प्रतिशुल्‍क (1.3.2008 से) जमा 3 प्रतिशत शिक्षा उपकर भी बरकरार रहा।

चीनी मौसम 2008-09 के दौरान चीनी के उत्‍पादन में गिरावट आई थी और चीनी के घरेलू स्‍टॉक को बढ़ाने के लिए केन्‍द्र सरकार ने चीनी मिलों द्वारा शून्‍य शुल्‍क पर अग्रिम प्राधिकार स्‍कीम के तहत दिनांक 17.02.2009 से दिनांक 30.09.2009 तक कच्‍ची चीनी के आयात तथा दिनांक 17.04.2009 से खुले सामान्य लाइसेंस (ओजीएल)के तरह शून्‍य शुल्‍क पर कच्‍ची चीनी के आयात की अनुमति प्रदान की थी, जो 30.06.2012 तक जारी रही। इसके पश्‍चात दिनांक 13.07.2012 से चीनी के आयात पर 10% की संतुलित दर से पुन: शुल्‍क लगाया गया जो बाद में बढ़ाकर 08.07.2013 से 15% कर दिया गया और 20.08.2015 से 15% से बढ़ाकर 25% कर दिया गया है। 30.04.2015 से आयात सेवा को 25% से बढ़ाकर 40% कर दिया गया है। उसके बाद, खुले सामान्य लाइसेंस (ओजीएल)के अधीन मुश्‍किल से ही कोई आयात हुआ हो।

डीजीसीआईएस कोलकाता द्वारा प्रकाशित सूचना के अनुसार, चीनी मौसम 2009-10 से 2015-16 तक चीनी की निर्यात/आयात की गई मात्रा नीचे दी गई है:-

चीनी का निर्यात

चीनी मौसम (अक्तूबर-सितम्‍बर) मात्रा (लाख मी. टन में) **
2009-10 2.371
2010-11 28.14
2011-12 36.74
2012-13 12.02
2013-14 26.85
2014-15 24.32
2015-16 (फरवरी, 2016 तक) (अ) 19.39

*इसमें ओजीएल के अंतर्गत 22 लाख टनों का आयात शामिल है।

चीनी का आयात

(मी. टन में)

चीनी मौसम आयात की गई मात्रा**
2009-10 41.80
2010-11 3.65
2011-12 1.886
2012-13(अ) 17.12
2013-14(अ) 10.788
2014-15 12.82
2015-16 (फरवरी, 2016 तक) (अ) 10.38

* अग्रिम प्राधिकार स्‍कीम के तहत मात्रा शामिल है।
(अ)-अनन्तिम

कच्‍ची चीनी के उत्‍पादन के विपणन और संवर्द्धन के लिए प्रोत्‍साहन स्‍कीम

सरकार ने 28.02.2014 को एक और स्‍कीम अधिसूचित की है जिसमें 2013-14 और 2014-15 के चीनी मौसमों के दौरान 40 लाख टन मात्रा के लिए निर्यात बाजार के लिए लक्षित कच्‍ची चीनी के उत्‍पादन के लिए विपणन और संवर्द्धन के लिए प्रोत्‍साहन देने का प्रावधान है। चीनी मौसम 2014-15 के दौरान कच्‍ची चीनी के निर्यात के लिए प्रोत्‍साहन राशि को 4000 प्रति मी. टन तक बढ़ाया गया बशर्ते कि इसकी सीमा 14 लाख मी. टन हो। इस स्‍कीम के अधीन उपलब्‍ध प्रोत्‍साहन का उपयोग चीनी मिलों द्वारा किसानों को भुगतान करने के लिए किया जाएगा। चीनी मौसम 2013-14 के अंत तक इस प्रोत्‍साहन स्‍कीम के अंतर्गत लगभग 7.75 लाख मी. टन कच्‍ची चीनी को शामिल किया गया है और चीनी मौसम 2014-15 के अंत तक लगभग 5.85 लाख मी. टन को पूरा कर दिया है।

चीनी उद्योग के लिए विकास परिषद

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चीनी उद्योग विकास परिषद एक सांविधिक निकाय है। जिसकी स्‍थापना वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय के दिनांक 12 मार्च, 1954 की अधिसूचना एसआरओ 892 द्वारा उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम,1951 की धारा-6 के अंतर्गत की गई है। कार्यकाल समाप्‍त होने पर यह परिषद पुन: दो वर्ष की अवधि के लिए गठित की जाती है। पिछली बार चीनी उद्योग विकास परिषद 5 सितम्‍बर, 2011 को पुनर्गठित की गई थी और इसकी वैधता 4 सितम्‍बर, 2013 तक थी। इसकी दो स्‍थायी समितियां हैं, नामत: चीनी मानक संबंधी स्‍थायी सलाहकार समिति (एसएसीएसएस), और स्‍थायी अनुसंधान सलाहकार समिति (एसआरएसी) जो विशिष्‍ट उद्देश्‍यों के लिए गठित की गई हैं। इन स्‍थायी उप समितियों का कार्यकाल परिषद के कार्यकाल के साथ-साथ समाप्‍त हो जाता है।

सरकार ने हाल ही में यह निर्णय लिया है कि चीनी उद्योग विकास परिषद (डीसीएसआई) को समाप्त भी किया जाए और इसका आगे पुनर्गठन न किया जाए। विकास परिषद की दो उप समितियों को भंग भी किया जाएं।

  • शर्करा मानकों (एसएसीएसएस) पर स्‍थाई परामर्शी समिति का कार्य चीनी फैक्‍ट्रियों, व्‍यापार, सरकारी संगठनों, आदि द्वारा तथा चीनी के विभिन्‍न ग्रेडों के लिए कीमत भिन्‍नताओं और अन्‍य संबंधित मामलों की समीक्षा हेतु वर्ष से वर्ष तक भारतीय शर्करा मानकों को लागू करने की सिफारिशों के लिए खाद्य और कृषि प्रभाग ‘’बी आई एस’’ के प्रमुख की सहमति के साथ खाद्य और कृषि प्रभाग (एफएडी-2) भारतीय मानक ब्‍यूरो (बीआईएस) की शर्करा उद्योग प्रभागीय समिति को सौंपा जाए।
  • स्‍थाई अनुसंधान परामर्शी समिति (एसआरएसी) का कार्य अब से एसडीएफ नियमावली के अंतर्गत चीनी उद्योग, स्‍वीकृत अनुसंधान कार्यों और अन्‍य संबंधित मामलों के संबंध में की गई प्रगति की निगरानी, से संबंधित अनुसंधान के क्रियाकलापों के संचालन के लिए अनुदान की स्‍वीकृति हेतु चीनी फैक्‍ट्रियों, वैज्ञानिक संगठनों तथा अन्‍य संबंधित संगठनों से प्राप्‍त अनुसंधान स्‍कीमों की जांच शर्करा विकास निधि (एसडीएफ) की स्‍थाई समिति के अधीन गठित की जाने वाली उपसमिति द्वारा की जाएगी।

ई-सुशासन पहल

चीनी क्षेत्र में डाटा प्रबंधन प्रणाली में सुधार लाने और व्‍यवस्‍थित करने के लिए खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग में शर्करा और वनस्‍पति तेल निदेशालय ने मासिक आधार पर चीनी मिलों द्वारा सूचनाओं को ऑनलाइन प्रस्‍तुत करने के लिए वेब आधारित प्‍लेटफार्म (esugar.nic.in/sugar_pII) विकसित किया है। इससे सरकार को चीनी क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन के लिए त्‍वरित और नीतिगत निर्णय लेने में सहायता मिली है। इस नई प्रणाली से चीनी मिलों के डाटा प्रबंधन के साथ-साथ सरकार के काम करने में पारदर्शिता दिखाई देती है। यह पार्टल उत्‍पादन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए लेवी चीनी के स्‍टॉक का उपयोग, अर्द्धमासिक आधार पर चीनी मिलों का गन्‍ना मूल्‍य बकाया इत्‍यादि से संबंधित सूचना प्राप्‍त करने के लिए राज्‍य सरकारों के साथ ऑनलाइन संपर्क साधने हेतु विंडो मुहैया कराती है।

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