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अंतर्राष्ट्रीय अनाज परिषद (आईजीसी)

भारत अन्‍तर्राष्‍ट्रीय अनाज परिषद (आईजीसी) का सदस्‍य है जिसे पूर्व में वर्ष 1995 तक अन्‍तर्राष्‍ट्रीय गेहूं परिषद के रूप में जाना जाता था और यह गेहूं तथा मोटे अनाजों के मामले में सहयोग के लिए निर्यातक तथा आयातक देशों का एक अन्‍तर-सरकारी मंच है। यह अनाज व्यापार अभिसमय 1995 का प्रशासन करता है। यह वर्ष 1949 से लंदन में स्‍थित आईजीसी सचिवालय खाद्य सहायता सम्‍मेलन के अन्‍तर्गत स्‍थापित खाद्य सहायता समिति के लिए भी सेवाएं प्रदान करता है। अंतर्राष्ट्रीय आनक करार में अनाज व्यापार अभिसमय (जीटीसी) और खाद्य सहायता अभिसमय (एफएसी) शामिल है। भारत, अन्‍तर्राष्‍ट्रीय अनाज करार 1995 तथा इसके अनाज व्‍यापार अभिसमय (जीटीसी) 1995, जो दिनांक 01 जुलाई, 1995 से प्रभावी हुआ है, का हस्‍ताक्षरकर्ता देश है। अंतर्राष्ट्रीय अनाज परिषद में दो प्रकार के सदस्य हैं – आयातक सदस्य तथा निर्यातक सदस्य। भारत को जुलाई, 2003 में निर्यातक सदस्‍य की श्रेणी में शामिल किया गया था और इसने समय-समय पर आयोजित परिषद की बैठकों/सत्रों में प्रतिनिधित्‍व किया है। इसके अतिरिक्‍त, विभाग आईजीसी की अन्‍य बैठकों, जैसे बाजार स्‍थिति समिति की बैठकों और कार्यकारी समिति बैठकों में भी भाग लेता है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग उक्त परिषद को वार्षिक सदस्‍यता अंशदान का भुगतान करता है।

अंतर्राष्ट्रीय अनाज परिषद के 44वें सत्र का आयोजन लंदन, यू.के. में 5 दिसम्बर, 2016 को किया गया था, जहां आईजीसी अनाज सम्मेलन में भारतीय शिष्टमंडल ने भाग लिया था, जिसमें भारतीय खाद्य निगम के कार्यकारी निदेशक श्री एस पी कर एवं खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के उप सचिव श्री धीरेन्द्र कुमार शामिल थे।

वर्ष 2014 के दौरान, इस विभाग के अधिकारियों/प्रतिनिधिमंडल ने अन्तथर्राष्ट्रीय अनाज परीषद की निम्न2लिखित बैठकों में भाग लिया और विचार-विमार्श में भाग लिया:-

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