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गैर-बासमती चावल और गेहूं के आयात नीति

  • वर्ष 2003-04 के बाद केंद्रीय पूल के लिए चावल का कोई आयात नहीं किया गया है।
  • केंद्रीय पूल में कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने वर्ष 2006-07 और 2007-08 के दौरान गेहूं आयात करने का निर्णय लिया था। वर्ष 2006-07 के दौरान 204.65 अमेरिकी डॉलर (9,240.72 रुपये) प्रति टन के भारित औसत मूल्य पर 54.54 लाख टन की कुल मात्रा का आयात किया गया था और वर्ष 2007-08 में 372.82 अमेरिकी डॉलर/ 14,755.32 रुपये प्रति टन के भारित औसत मूल्य0 पर 17.69 लाख टन गेहूं की कुल मात्रा का आयात किया गया था।
  • रबी विपणन मौसम 2008-09 और बाद के वर्षों में गेहूं की रिकार्ड खरीद के मद्देनजर वर्ष 2008-09 के बाद केंद्रीय पूल के लिए गेहूं का कोर्इ आयात नहीं किया गया है। चावल और गेहूं पर आयात शुल्क निम्नानुसार हैं:

चावल

  • 01.03.2008 से 01.04.2009 तक आयात शुल्क शून्य है।
  • सरकार ने आयात शुल्क पर पूर्ण छूट दिनांक 31.03.2009 को वापस ले ली गई है और सेमी मिल्डक अथवा पूर्ण मिल्डा चावल पर 70% मूल्याननुसार की मूल सीमा शुल्क लगाया गया है।
  • राजस्व विभाग के दिनांक 14 अक्टूबर, 2009 की अधिसूचना सं0 118/2009- सीमा शुल्क द्वारा दिनांक 30.09.2010 तक चावल पर आयात शुल्क पुन: घटाकर शून्य कर दिया गया है। इसे दिनांक 1 अक्तूबर, 2010 की अधिसूचना सं0 102/2010- सीमाशुल्क द्वारा दिनांक 30.09.2011 तक पुन: बढ़ा दिया गया था।
  • खाद्यान्‍न के रिकार्ड उत्‍पादन और केंद्रीय पूल में खाद्यान्न की उपलब्धता को देखते हुए इसकी वैधता दिनांक 30.09.2011 के बाद बढ़ाई नहीं गई है।

गेहूं

  • गेहूं पर आयात शुल्क दिनांक 28.06.2006 से 50% से घटाकर 5% कर दिया गया।
  • आयात शुल्क दिनांक 09.09.2006 से और घटकर शून्य प्रतिशत तक कम हो गया था।
  • गेहूं पर दिनांक 07.08.2015 से 10% की दर से आयात शुल्क लगाया गया है।
  • गेहूं पर आयात शुल्क दिनांक 19.10.2015 से बढ़कर 25% तक हो गया है।
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