Banner नीति और भारतीय खाद्य निगम

खाद्य निगम लेखा

केन्द्रीय सरकार भारतीय खाद्य निगम तथा राज्य एजेंसियों के माध्यम से धान, मोटे अनाज एवं गेहूं हेतु मूल्य समर्थन प्रदान करती है। निर्दिष्ट केन्द्रों पर बिक्री के लिए लाया गया समस्त खाद्यान्न, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप होता है, सार्वजनिक खरीद एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद लिया जाता है। इस प्रकार खरीदा गया खाद्यान्न, पहचान किए गए लाभभोगियों को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) एवं अन्य कल्याणकारी स्कीमों के अंतर्गत राजसहायता प्राप्त मूल्यों पर वितरण हेतु राज्यों को आबंटित किया जाता है। खाद्यान्नों की आर्थिक लागत और निर्गम मूल्यों का अंतर उपभोक्ता सब्सिडी के रूप में केन्द्रीय सरकार द्वारा वहन किया जाता है। लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) तथा अन्य कल्याणकारी स्कीमों की जरूरतों को पूरा करने के लिए खाद्यान्नों की खरीद करने के अलावा, देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु बफर स्टॉक की जरूरतों को पूरा करने की बाध्यता भी केन्द्रीय सरकार पर है। अतः कुल खाद्य सब्सिडी का एक भाग बफर स्टॉक के रखरखाव की लागत को पूरा करने के लिए बफर सब्सिडी के रूप में व्यय किया जाता है।

उपभोक्ता सब्सिडी

· भारत सरकार ने अक्तूबर, 1997 तक खाद्यान्नों की खरीद तथा राज्यों को इनके वितरण हेतु अपने प्रचालन भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से किए थे। आर्थिक लागत और केन्द्रीय निर्गम मूल्य/बिक्री से औसत प्राप्ति के अंतर की प्रतिपूर्ति भारतीय खाद्य निगम को उपभोक्ता राजसहायता के रूप में की जाती है।

· सरकार ने सब्सिडी के निर्गम को कम करके बचत करने, खरीद और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की कार्यदक्षता बढ़ाने तथा अधिकतम सीमा तक स्थानीय खरीद को प्रोत्साहित करने के साथ साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ स्थानीय किसानों को दिलाने के उद्देश्य से खाद्यान्नों की विकेंद्रीकृत खरीद की स्कीम वर्ष 1997-98 में शुरू की थी। 15 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों अर्थात आंध्र प्रदेश, अंडमान एवं निकोबार द्वीप-समूह, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, उड़ीसा, राजस्थान, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड, और पश्चिम बंगाल ने विकेंद्रीकृत खरीद स्कीम अपनाई है। राज्य सरकारों द्वारा खाद्यान्नों की खरीद, भंडारण और वितरण की आर्थिक लागत का निर्धारण भारत सरकार द्वारा राज्य सरकारों के परामर्श से किया जाता है और इस प्रकार निर्धारित आर्थिक लागत एवं विभिन्न कल्याणकारी स्कीमों के अंतर्गत केन्द्रीय निर्गम मूल्य के अंतर की प्रतिपूर्ति राज्यों को खाद्य सब्सिडी के रूप में की जाती है। भारत सरकार अन्य राज्यों को भी यह स्कीम अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

सब्सिडी का निर्गम

भारतीय खाद्य निगम के लिए सब्सिडी का निर्गम

भारतीय खाद्य निगम को अग्रिम सब्सिडी त्रैमासिक आधार पर संबंधित तिमाही के पहले माह में अगली तिमाही के दौरान अनुमानित उठान के आधार पर भारतीय खाद्य निगम द्वारा प्रस्तुत कुल अनुमेय दावों के 95% की दर से जारी की जाती है। अनुमानित उठान की गणना पिछले तीन माह के दौरान किए गए उठान के आधार पर की जानी अपेक्षित है। इस अग्रिम सब्सिडी का समायोजन वर्ष समाप्त होने के बाद वास्तविक उठान हेतु जारी अनंतिम सब्सिडी में कर लिया जाता है। शेष 5% सब्सिडी अंतिम लेखा परीक्षित लेखों के आधार पर भारतीय खाद्य निगम द्वारा दावे प्रस्तुत करने के बाद जारी की जाती है।

विकेंद्रीकृत खरीद प्रणाली (डीसीपी) राज्यों के लिए सब्सिडी का निर्गम

डीसीपी राज्यों को अग्रिम त्रैमासिक सब्सिडी अगले माह के अनुमानित उठान, जिसकी गणना विगत दो तिमाहियों के उठान के आधार पर की जाती है, के लिए उस राज्य के अनुमेय दावे की 90% की दर से जारी की जाती है। तिमाही के अंत में राज्य सरकारों को अनंतिम सब्सिडी भी जारी कर दी जाती है। राज्यों को अनंतिम सब्सिडी जारी करते समय उनके द्वारा व्यय की गई लागत में से स्थायी लागत का 100% तथा परिवर्तनीय लागत का 95% जारी किया जाता है। परिवर्तनीय लागत की शेष 5% राशि राज्यों के लेखा परीक्षित लेखों के आधार पर निकली गई आर्थिक लागत को अंतिम रूप देने के बाद जारी की जाती है।

बफर सब्सिडी

खाद्यान्नों की कमी की स्थिति से निपटने और बाजार में मूल्य वृद्धि होने पर मूल्यों को स्थिर रखने के उद्देश्य से प्रभावी तथा सकारात्मक हस्तक्षेप करने में सरकार को समर्थ बनाने के लिए भारतीय खाद्य निगम को खाद्य सुरक्षा के एक उपाय के रूप में बफर स्टॉक तैयार करने के लिए खरीदे गए खाद्यान्नों का एक भाग रखना होता है। भारतीय खाद्य निगम को कुल खाद्य सब्सिडी के भाग के रूप में बफर स्टॉक के रखरखाव प्रभार की प्रतिपूर्ति की जाती है, जिसमें मालभाड़ा, भंडारण तथा ब्याज प्रभार जैसे व्यय शामिल होते हैं।


वर्षवार सब्सिडी

विगत 6 वर्षों के दौरान भारतीय खाद्य निगम तथा विकेंद्रीकृत खरीद वाले राज्यों को जारी की गई सब्सिडी का ब्यौरा निम्नानुसार है :-

(रुपए.करोड़ मे)

भारतीय खाद्य निगम/ राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश वर्ष 2010-11 वर्ष 2011-12 वर्ष 2012-13 वर्ष 2013-14 वर्ष 2014-15 वर्ष 2015-16
भारतीय खाद्यनिगम 50729.560 59525.900 71980.00 75500.02 91995.3541 112000.00
आंध्र प्रदेश - - 225.514 1554.83 2254.42 1364.25
बिहार 0.00 0.00 0.00 0.00 1146.41 2540.92
मध्य प्रदेश 2013.760 2964.830 3356.71 3398.882 5668.11 5737.29
उत्तर प्रदेश * 2485.340 1219.620 39.256 5.182 0.00 0.00
पश्चिम बंगाल 1241.070 1481.730 1816.13 1551.138 2578.38 2465.86
छत्तीसगढ़ 1923.480 1670.360 2345.39 2374.8744 3332.71 3328.93
उत्तराखंड 299.360 217.970 243.77 318.22 385.42 408.67
तमिल नाडु 1501.030 1897.720 1176.28 1007.49 914.55 936.89
गुजरात 20.150 59.620 115.140 0.000 0.000 55.57
उड़ीसा 2243.970 2934.710 2731.50 3041.11 3785.00 3331.39
कर्नाटक 0.000 0.000 0.000 492.950 0.00 0.00
Kerala 471.840 398.440 524.310 427.82 744.84 834.42
पंजाब 0.00 0.00 0.00 0.00 75.00 300.00
राजस्थान 0.00 0.00 0.00 67.50 90.97 155.11
तेलंगाना 0.00 0.00 0.00 0.00 200.00 1390.08
डी.बी.टी. योजना - - - - - 69.618
कुल (राज्य और डी.बी.टी.) 12200.000 12845.000 12574.00 14240.00 21175.81 22919.00
कुल (भारतीयखाद्य निगम + राज्य+ डी.बी.टी.) 62929.560 72370.900 84554.00 89740.02 113171.1641 134919.00

* उत्तर प्रदेश ने डी.बी.टी. योजना छोड़ दी है।

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