Banner अंतरराष्ट्रीय सहयोग

अक्सवर पूछे जाने वाले प्रश्ना

वैश्विक भुखमरी सूचकांक (जीएचआई)

वैश्विक भुखमरी सूचकांक क्या है और इस सूचकांक में भारत की स्थिति क्या है?

वैश्विक भुखमरी सूचकांक एक ऐसा सूचकांक है, जिसमें 100-प्वांइट स्केल पर देशों को रैंक प्रदान किया जाता है, जिसमें सर्वश्रेष्ठ स्कोर शून्य (कोई भुखमरी नहीं) होता है और 100 प्वांइट सबसे बदतर स्थिति होती है| वैश्विक भुखमरी सूचकांक रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रत्येक वर्ष प्रकाशित की जाती है| अक्तूीबर, 2014 में प्रकाशित अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान की हाल की वैश्विक भुखमरी सूचकांक रिपोर्ट के अनुसार 120 देशों में से भारत को 17.8 के स्कोर के साथ 55वां स्थान दिया गया था जबकि 2013 की जीएचआई रिपोर्ट के अनुसार 120 देशों में से भारत को 21.3 के स्कोर के साथ 63वां स्थान दिया गया था|

वैश्विक भुखमरी सूचकांक की गणना किस प्रकार की जाती है?

वैश्विक भुखमरी सूचकांक की गणना समान रूप से महत्वपूर्ण तीन सूचकों को मिलाकर की जाती है| ये सूचक हैं

  • अल्प पोषण : जनसंख्या में से अल्प पोषित लोगों का प्रतिशत (यह कैलरी का अपर्याप्त उपभोग करने वाली जनसंख्या का हिस्सा दर्शाता है);
  • बच्चों में वजन की कमी :पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों का अनुपात, जिनका वजन आवश्यकता से कम है (अर्थात उनकी आयु की तुलना में उनका वजन कम होता है, जो क्षय रोग अथवा अवरूद्ध विकास अथवा दोनों का द्योतक है), जो बच्चों के कुपोषण का एक सूचक है
  • बाल मृत्यु :पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (इससे आंशिक रूप से कैलरी के अपर्याप्त उपभोग तथा खराब पर्यावरण के घातक प्रभाव का पता चलता है)।

वैश्विक भुखमरी सूचकांक (जीएचआई) पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया है?

जीएचआई केवल कुपोषण का द्योतक है, न कि भुखमरी का; और यह मोटे तौर पर पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों से संबंधित आंकड़ों पर आधारित है। यह सूचकांक भुखमरी से ग्रस्त लोगों की संख्या अथवा समाज में लोगों को भोजन की अनुपलब्धता अथवा सुलभता नहीं दर्शाता है। अतः यह देश में भुखमरी की स्थिति दर्शाने के लिए कोई उचित सूचकांक नहीं है और देश के अन्य क्षेत्रों के साथ तुलना करने के लिए भी इसे प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है।

वैश्विक भुखमरी सूचकांक विशेषताएं क्या हैं?

वैश्विक भुखमरी सूचकांक (जीएचआई) रिपोर्ट 2014 में यह उल्ले ख किया गया है कि जीएचआई अपने तीन घटक संकेतकों के अलग-अलग वर्षों के आंकड़ों पर आधारित है। कुपोषित व्य क्तिकयों के अनुपात संबंधी आंकड़े, वर्ष 2011-2013 (2014 एफएओ) के अनुसार है, जबकि बाल मृत्यु दर संबंधी आंकड़े वर्ष 2012 के अनुसार हैं और कम वजन के बच्चों से संबंधित आंकड़े हाल के वर्ष के हैं जो वर्ष 2009-2013 की अवधि के दौरान उपलब्ध हैं। तथापि, रिपोर्ट में यह उल्ले ख है कि भारत के नवीनतम जीएचआई स्कोर आंशिक रूप से पुराने आंकड़ों पर आधारित है: जबकि इसमें बाल मृत्यु दर के आंकड़े अपेक्षाकृत हाल ही के अर्थात् वर्ष 2012 के अनुसार हैं और बच्चों में कुपोषण के विरूद्ध अभियान में हुई प्रगति जीएचआई 2014 में शामिल नहीं की गई है।

इसके अलावा, इस अध्ययन के निष्कर्षों की न तो परीक्षण जांच की गई है और न ही इन्हें देश में बड़े पैमाने पर किए गए किसी प्राथमिक फील्ड सर्वेक्षण द्वारा वैधीकृत किया गया है। तथापि, कृषि औए सहकारिता विभाग, कृषि भवन में दिनांक 19 अक्तूबर, 2012 को आयोजित एक बैठक में जीएचआई की कमियों अथवा सीमाओं से आईएफपीआरआई को अवगत कराया गया था, जिसमें उन्होने संबंधित विभागों के समक्ष इस रिपोर्ट के बारे में एक प्रस्तुतीकरण दिया था। तथापि, रिपोर्ट में उपलब्ध आंकड़ों को देखने से ज्ञात होता है कि तीनों सूचकांकों के संबंध में जनसंख्या के प्रतिशत में 1990 से 2014 तक लगातार कमी हुई है।

देश में खाद्य सुरक्षा की स्थिति में सुधार करने के लिए सरकार द्वारा क्या उपाय किए जाते हैं?

जहां तक देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का संबंध है, भारत सरकार ने देश में भुखमरी और कुपोषण की समस्या को उच्च प्राथमिकता दी है और यह देश में खाद्य सुरक्षा की स्थिति में सुधार करने के उद्देश्य से राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों के माध्यम से विभिन्न मंत्रलयों/विभागों की अनेक योजनाएं एवं कार्यक्रम कार्यान्वित कर रही है| देश में करोड़ों गरीब लोगों को खाद्य सुरक्षा मुहैया कराने के अपने प्रयासों में भारत सरकार द्वारा की गई प्रमुख पहलों में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली भी शामिल है| सार्वजनिक वितरण प्रणाली की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा केंद्रीय पूल में न्यूनतम समर्थन मूल्य संबंधी प्रचालनों के माध्यम से खाद्यान्नों की खरीद से भी यह सुनिश्चित होता है कि किसानों को लाभकारी मूल्य मिलेगा जिससे उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ावा मिल रहा है| इस प्रकार, सार्वजनिक वितरण प्रणाली से किसानों को लाभकारी मूल्य तथा समाज के कमजोर वर्ग को वाजिब मूल्यों पर खाद्यान्नों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है|

इन प्रयासों को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 अधिसूचित किया है ताकि लोगों को गरिमामय जीवन जीने के लिए उन्हें वाजिब मूल्यों पर पर्याप्त खाद्यान्न सुनिश्चित करके मानव जीवन चक्र दृष्टिकोण के अनुसार उन्हें खाद्य और पोषणिक सुरक्षा प्रदान की जा सके। इस अधिनियम में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत अत्यधिक राजसहायता प्राप्त खाद्यान्न प्रदान करने के लिए 75% तक ग्रामीण और 50% तक शहरी जनसंख्या को कवर करने का प्रावधान है। इस अधिनियम के अंतर्गत देश की दो-तिहाई जनसंख्या अथवा लगभग 81 करोड़ व्यक्तियों को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत लाभ प्राप्त होने का अनुमान है। इस अधिनियम में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं अथवा 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को पौषणिक सहायता प्रदान करने का भी प्रावधान है|

सार्क खाद्य बैंक

सार्क खाद्य बैंक क्या है और इसमें भारत का योगदान क्या है?

3 - 4 अप्रैल, 2007 को नई दिल्ली में आयोजित 14वें सार्क शिखर सम्मेलन के अनुसरण में सार्क खाद्य बैंक की स्थापना के बारे में सार्क सदस्य देशों के बीच हुए एक करार का अनुसमर्थन भारत के राष्ट्रपति ने 17 अप्रैल 2007 को किया, जिसके उद्देश्यर निम्नालनुसार हैं:-

  • सामान्य समय के दौरान और आपात स्थिति के दौरान खाद्यान्नों की कमी की पूर्ति के लिए सार्क सदस्य देशों के लिए एक क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा रिजर्व के रूप में कार्य करना; और
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा प्रयासों के लिए क्षेत्रीय समर्थन प्रदान करना; सदस्यि देशों के बीच भागीदारी और क्षेत्रीय एकीकरण का संवर्धन करना तथा सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से अपने क्षेत्र में भोजन की कमी का समाधान करना।

समझौते के अनुसार सार्क खाद्य बैंक के रिज़र्व खाद्यान्नों के कुल 2,43,000 टन के संग्रह में भारत का आकलित हिस्सा् 1,53,200 टन था जिसे बाद में बढ़ाकर दोगुना किया गया है और तदनुसार 4,86,000 टन के कुल आकलित हिस्सेा में भारत का वर्तमान हिस्साा 3,06,400 टन है।

खाद्यान्न संग्रह में भारत का हिस्सा कहां रखा जाता है?

खाद्यान्न संग्रह में भारत का आकलित हिस्सा, जरुरत के समय खाद्यान्नों के संचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए देश के विभिन्न महत्वापूर्ण स्थायनों पर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के निर्दिष्टन गोदामों में रखा जाता है।

क्या सरकार का देश में सूखे और खाद्यान्न की कमी को देखते हुए उक्तप खाद्य बैंक के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर पुनर्विचार करने का प्रस्ताव है?

चूकिं यह बैंक इस तरह की आकस्मि कताओं के लिए ही स्थापित किया गया है, इसलिए अपनी प्रतिबद्धता पर पुनर्विचार करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

अब तक सार्क खाद्य बैंक बोर्ड की कितनी बैठकें आयोजित की गई हैं:

करार पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद खाद्य बैंक बोर्ड द्वारा एक विशेष (5वें) सत्र सहित सात बैठकों का आयोजन किया गया। खाद्य और सार्वजनिक विभाग में संयुक्त सचिव (आईसी) को भारत की ओर से सार्क खाद्य बैंक बोर्ड का सदस्यव नामित किया गया है, जबकि विदेश मंत्रालय के सार्क प्रभाग के संयुक्त सचिव को सार्क खाद्य बैंक से जुड़े मामलों के लिए नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

भारत ने 7वें सार्क खाद्य बैंक बोर्ड (एसएफबी) का आयोजन नई दिल्ली, भारत में 10-11 नवंबर, 2014 को किया था। अफगानिस्तान को छोड़कर सार्क के सभी सदस्य देशों ने इस बैठक में भाग लिया था। इसके अलावा सार्क सचिवालय, काठमांडू और सार्क कृषि केंद्र, ढाका के अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया था। बैठक की शुरूआत सार्क खाद्य बैंक बोर्ड, भूटान के प्रतिनिधि द्वारा सार्क खाद्य बैंक बोर्ड, भारत के सदस्य श्री अजय सक्सेना, संयुक्त सचिव, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग को अध्यक्षता सौंपते हुए की गई।

सार्क खाद्य बैंक में सार्क के प्रत्ये्क सदस्य देश का हिस्सा कितना है ?

फिलहाल सदस्य देशों द्वारा रखे जाने वाले आनुपातिक खाद्यान्न रिजर्व का ब्यौमरा इस प्रकार है:

देश आकलित रिजर्व -
- वर्ष 2008 में कोलंबो में आयोजित प्रथम बैठक के निर्णय के अनुसार वर्ष 2009 में काबुल में आयोजित तीसरी बैठक के निर्णय के अनुसार
अफ़ग़ानिस्तान 1420 2840
बांग्लादेश 40000 80000
भूटान 180 360
भारत 1,53,200 3,06,400
मालदीव 200 400
नेपाल 4000 8000
पाकिस्तान 40000 80000
श्रीलंका 4000 8000
कुल 2,43,000 4,86,000

सार्क खाद्य अनाज परीक्षण प्रयोगशाला क्या है और यह कहाँ स्थिूत है?

नवम्बकर, 2013 में थिंपू, भूटान में आयोजित छठी दक्षेस खाद्य बैंक बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव किया गया कि शुरूआती तौर पर भारत में उपलब्ध मौजूदा प्रयोगशाला सुविधाओं को दक्षेस खाद्यान्ना परीक्षण प्रयोगशाला के रूप में निर्दिष्टू किया जाए। बोर्ड ने नई दिल्ली स्थिकत केन्द्री य अनाज विश्लेकषण प्रयोगशाला (सीजीएएल) को दक्षेस खाद्य बैंक के लिए क्षेत्रीय संदर्भ प्रयोगशाला के रूप में नामित करने संबंधी प्रस्ताशव पर विचार किया और उस पर सहमति व्ययक्तप की। इसके अतिरिक्तस, बोर्ड ने भारतीय अनाज भंडारण प्रबंधन और अनुसंधान संस्थारन (आईजीएमआरआई), हापुड़ में खाद्यान्नत भंडारण प्रबंधन में प्रशिक्षण देने से संबंधित भारत के प्रस्ताीव पर भी सहमति व्यसक्ता की। आईजीएमआरआई, हापुड़ में सार्क सदस्य देशों के अधिकारियों के लिए पहला प्रशिक्षण दिनांक 17 से 26 नवंबर, 2014 तक आयोजित किया गया था। 5 सदस्य देशों अर्थात बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका के प्रतिभागियों से प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए नामांकन हुए हैं।

शीर्ष पर वापस जाएँ