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"भंडारण और गोदाम” योजना – एफ.सी.आई. द्वारा गोदामों का निर्माण

यह विभाग पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्‍यान केंद्रित करने के साथ गोदमों के निर्माण के लिए केन्‍द्रीय क्षेत्र की स्‍कीम कार्यान्‍वित कर रहा है। यह स्‍कीम कुछ अन्‍य राज्‍यों जैसे हिमाचल प्रदेश तथा केरल में भी प्रचालित की जा रही है। भारतीय खाद्य निगम को भूमि अधिग्रहित करने तथा भंडारण गोदामों के निर्माण एवं संबंधित आधारभूत संरचनाओं जैसे रेलवे साइडिंग, विद्युतिकरण, धर्मकांटा लगाने आदि के लिए इक्‍विटी के रुप में निधियां जारी की जाती हैं।

 यह स्‍कीम अगले तीन वर्षों अर्थात 2017-18 से 2019-20 तक जारी रहेगी। इस संबंध में भौतिक और वित्तीय लक्ष्य और उपलब्धियां नीचे दी गई हैं:-

एजेंसी

राज्‍य

2017-20 तक बनाई जाने वाली क्षमता (टन में)

जुलाई 2018, तक जारी की गयी
इक्विटी (करोड़ रुपए में)

जुलाई 2018, तक निर्मित क्षमता (टन में)

भौतिक (टन में)

वित्‍तीय (करोड़ रुपए में)

एफसीआई

असम

*55,000

124.45

58.50

अरुणाचल प्रदेश.

6,130

10.45

3,340

मणिपुर

*24,600

43.48

मेघालय

7,500

13.03

मिजोरम

10,000

40.00

नागालैंड

4,590

2.48

4,590

सिक्‍किम

*5,000

5.80

त्रिपुरा

20,000

75.72

कुल (पूर्वोत्तर)

*1,32,820

315.41

7,930

हिमाचल प्रदेश

11220

22.70

-

केरल

15000

11.63

झारखंड

#63000

70.25

कुल अन्य

#89,220

104.58

कुल (पूर्वोत्तर + अन्य)

*2,22,040

419.99

58.50

7,930

12 वीं एफ.वाई.पी. में अव्ययित शेष (- 40.28 करोड़) लेने के बाद कुल

379.71

* निम्नलिखित कारणों से 1,19,220 मीट्रिक टन की अनुमोदित क्षमता की बजाय कुल लक्षित क्षमता एफसीआई द्वारा 1,32,820 मीट्रिक टन के रूप में संशोधित की गई है: -
1. बिष्णूपुर (मणिपुर) में भूमि की बाधा के कारण 400 मीट्रिक टन क्षमता की कमी है।
2. अनुमोदित क्षमता 2,500 मीट्रिक टन के खिलाफ 15,000 मीट्रिक टन के निर्माण के लिए उपयुक्त कोकराझार (असम) में एफसीआई द्वारा पहचाने गए भूमि को देखते हुए।
3. अनुमोदित क्षमता 3,500 मीट्रिक टन के खिलाफ 5000 मीट्रिक टन के निर्माण के लिए उपयुक्त डेंटम (सिक्किम) में एफसीआई द्वारा पहचाने गए भूमि को देखते हुए।
# झारखंड में डुमका (चरण -1), भूमि की बाधा के कारण अनुमोदित क्षमता में 2000 एमटी क्षमता की कमी आई है।
नोट: उपरोक्त अवशिष्ट/विविध के अतिरिक्त, कार्य 12 वीं एफ॰वाई॰पी॰ के तहत अनुमोदित तुरा (मेघालय) और पूर्वी कामेंग (सेप्पा) (अरुणाचल प्रदेश) पर 2 स्थानों पर प्रगति पर है।

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