खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू)

खाद्यान्नों के केंद्रीय पूल को मुख्य रूप से सूखा, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं जैसी अप्रत्याशित आकस्मिकताओं को पूरा करने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा सरकार के खाद्यान्न आधारित कल्याण कार्यक्रमों के लिए अपेक्षित खाद्यान्न प्रदान करने हेतु न्यूनतम बफर स्टाक रखने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा, सरकार के अनुदेशों पर भारतीय खाद्य निगम समय-समय पर खुले बाजार में पूर्व निर्धारित मूल्यों पर खाद्यान्नों अर्थात् गेहूं और चावल की बिक्री करता रहा है ताकि निम्नलिखित उद्देश्य हासिल किए जा सकें:-

विशेष तौर पर कमी के मौसम के दौरान खाद्यान्नों की आपूर्ति बढ़ाना और इस प्रकार खुले बाजार के मूल्यों पर अच्छा और संयतकारी प्रभाव डालना।

केंद्रीय पूल में अधिशेष स्टाक को कम करना और यथासंभव सीमा तक खाद्यान्नों की रखरखाव लागत करना।

 

खाद्यान्नों की गुणवत्ता खराब होने से बचाना और खाद्यान्नों का उपयोग मानव उपभोग के लिए करना।

गेहूं/चावल के आगामी विपणन मौसम के दौरान खरीदे जाने वाले स्टाक के लिए बहुमूल्य भंडारण स्थान खाली करना।

क्रेताओं की पात्रता

रोलर फ्लोर मिल, बेकरी मालिक, बिस्कुट निर्माता आदि जैसे बल्क उपभोक्ताओं सहित कोई व्यक्ति/पार्टी उस हालत में भारतीय खाद्य निगम से खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू) के अधीन न्यूनतम 10.00 टन गेहूं खरीद सकता है यदि भारतीय खाद्य निगम लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याण योजनाओं की आवश्यकता से अधिक स्टाक के पास उपलब्ध हो। फिलहाल खुले बाजार में गेहूं का निपटान करने से पहले, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याण योजनाओं की 3 माह की आवश्यकता के खाद्यान्न स्टाक में रखे जाने होते हैं।

खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू) के अधीन गेहूं के मूल्य

खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू) के अधीन गेहूं की बिक्री करने के लिए गेहूं के मूल्य समय-समय पर भारतीय खाद्य निगम की उच्च स्तरीय समिति द्वारा निर्धारित किए जाते हैं। वर्तमान मूल्य अनुबंध में दिए गए हैं जो अक्तूबर-दिसम्बर, 2005 की अवधि के लिए राज्य–वार और फसल वर्ष-वार (स्टाक का) आधार पर है इन मूल्यों में पंजाब/हरियाणा के गेहूं के मूल्य का घटक और लुधियाना (पंजाब) से गेहूं प्राप्त करने वाले राज्यों में 2 से 3 प्रमुख उपभोक्ता केंद्रों तक औसत प्रभारों के रूप में निकाले गए वास्तविक भाड़ा प्रभार के 85 प्रतिशत का घटक शामिल है।

खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू) के अधीन चावल की बिक्री

गेहूं की तरह चावल के बल्क उपभोक्ता न होने के कारण पूर्व निर्धारित मूल्यों पर खुले बाजार में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए चावल के स्टाक का निपटान करने के प्रयास सफल नहीं हुए हैं। इस बात को देखते हुए स्वीकार न किए जाने वाले ढील दी गई विनिर्दिष्टियों के चावल और श्रेणी-घ के चावल का ही निपटान समय-समय पर निविदाओं के जरिए किया जाता है।

अनुबंध-1

गेहूं का खुला बजार बिक्री योजना मूल्य

 

(जनवरी2006 से मार्च 2006 तक)
 

(रुपए प्रति क्विंटल)
 

क्र.सं. जोन राज्य/संघ राज्य क्षेत्र फसल वर्ष एल0एल0डब्ल्यू0 (01-02) व श्रेणी-ग और घ का गेहूं
      2005-06 2004-05 2003-04 2002-03 2001- 2002 2000- 2001 1999- 2000 1998 व पूर्व वर्ष  
1 उत्तर  जोन दिल्ली 844.00 829.00 819.00 769.00 759.00 749.00 729.00 689.00 639.00
2   चण्डीगढ़ 837.00 822.00 812.00 762.00 752.00 742.00 722.00 682.00 632.00
3   पंजाब 825.00 810.00 800.00 750.00 740.00 730.00 710.00 670.00 620.00
4   हरियाणा 825.00 810.00 800.00 750.00 740.00 730.00 710.00 670.00 620.00
5   उत्तर प्रदेश 865.00 850.00 840.00 790.00 780.00 770.00 750.00 710.00 660.00
6   जम्मू व कश्मीर 871.00 856.00 846.00 796.00 786.00 776.00 756.00 716.00 666.00
7 दक्षिण जोन तमिलनाडु 948.00 933.00 923.00 873.00 863.00 853.00 833.00 793.00 743.00
8   पांडिचेरी 948.00 933.00 923.00 873.00 863.00 853.00 833.00 793.00 743.00
9   केरल 952.00 937.00 927.00 877.00 867.00 857.00 837.00 797.00 747.00
10   लक्षद्वीप 997.00 982.00 972.00 922.00 912.00 902.00 882.00 842.00 792.00
11   कर्नाटक 945.00 930.00 920.00 870.00 860.00 850.00 830.00 790.00 740.00
12 पूर्व जोन बिहार 891.00 876.00 866.00 816.00 806.00 796.00 776.00 736.00 686.00
13   पश्चिम बंगाल 907.00 892.00 882.00 832.00 822.00 812.00 792.00 752.00 702.00
14   सिक्किम 920.00 905.00 895.00 845.00 835.00 825.00 805.00 765.00 715.00
15   उड़ीसा 924.00 909.00 899.00 849.00 839.00 829.00 809.00 769.00 719.00
16   झारखण्ड 908.00 893.00 883.00 833.00 823.00 813.00 793.00 753.00 703.00
17 पूर्वोत्तर जोन असम 933.00 918.00 908.00 858.00 848.00 838.00 818.00 778.00 728.00
18   अरु0 प्रदेश 974.00 959.00 949.00 899.00 889.00 879.00 859.00 819.00 769.00
19 पश्चिम जोन महाराष्ट्र 912.00 897.00 887.00 837.00 827.00 817.00 797.00 757.00 707.00
20   गोवा 926.00 911.00 901.00 851.00 841.00 831.00 811.00 771.00 721.00
21   मध्य प्रदेश 884.00 869.00 859.00 809.00 799.00 789.00 769.00 729.00 679.00
22   छत्तीसगढ़ 909.00 894.00 884.00 834.00 824.00 814.00 794.00 754.00 704.00
23   गुजरात 897.00 882.00 872.00 822.00 812.00 802.00 782.00 742.00 692.00
24   दमन व दीव 897.00 882.00 872.00 822.00 812.00 802.00 782.00 742.00 692.00
25   दादर व नगर हवेली 897.00 882.00 872.00 822.00 812.00 802.00 782.00 742.00 692.00

* 2006-07 में खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू) के तहत निपटान किए गए गेहूं का बिक्री मूल्य पूरे देश के लिए 986.06 रूपए प्रति क्विंटल की एक-समान दर पर निर्धारित किया गया था।

क्षतिग्रस्त खाद्यान्न

परिभाषा

खाद्यान्नों का वह स्टाक जो मानव उपभोग के लिए उपयुक्त खाद्यान्नों की विहित विनिर्दिष्टियों के अनुरूप नहीं होता है, उसे क्षतिग्रस्त खाद्यान्न कहते हैं।

खाद्यान्नों का क्षतिग्रस्त होना

हैंडलिंग, भंडारण और परिवहन के दौरान खाद्यान्नों की गुणवत्ता का संरक्षण करने के लिए सभी संभव उपाय करने के बावजूद भारतीय खाद्य निगम और राज्य वसूली एजेंसियों के पास रखे स्टाक का कुछ प्रतिशत उस सीमा तक खराब हो जाता है जिससे यह जारी करने योग्य अर्थात् मानव उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं रहता है।

क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों का निपटान

क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों का मानव उपभोग के अलावा अन्य प्रयोजनों अर्थात् पशुचारा और कुक्कट चारा, औद्योगिक उपयोग आदि प्रयोजनों के लिए निपटान किया जाता है। क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों के स्टाक का निपटान करते समय यह सुनिश्चित करने के लिए उचित सावधानी बरती जाती है कि इस स्टाक को अच्छे स्टाक के साथ मिश्रण किए जाने के लिए कारोबारी प्रक्रिया में जाने से बचाया जाए और अखाद्य प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाया जाए। अत: ऐसे स्टाक की पेशकश सर्वप्रथम राज्य सरकार के विभागों और उनके अधीन एजेसियों को की जाती है। यदि फिर भी स्टाक की बिक्री न हो तो इसे भारतीय खाद्य निगम के पास पंजीकृत उन पार्टियों को खुली निविदाओं के जरिए बेचा जाता है, जिनके पास पशु/कुक्कुट चारे का निर्माण करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी सुविधाएं हों और वास्तव में स्टाक को क्रेता से यह शपथ-पत्र लेने के बाद ही रिलीज किया जाता है कि उसके द्वारा खरीदे गए स्टाक का उपयोग उसी प्रयोजन के लिए, जिसके लिए यह खरीदा गया है।

क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों का श्रेणीकरण

क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों का श्रेणीकरण (i)चारा-1 (ii) चारा-2 (iii) चारा-3 (iv) औद्योगिक उपयोग (v) खाद और (vi) डम्पिंग के रूप में किया जाता है। क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों की चारा श्रेणियों में चारा-1 और चारा-2 का उपयोग पशु चारे के रूप में किया जाता है जबकि चारा-3 कुक्कुट/मत्स्य चारे आदि के लिए किया जाता है।

क्षतिग्रस्त खाद्यान्न के निपटान की दरें

(i) राज्य के विभागों और उनके अधीन एजेंसियों को निपटान

राज्य के विभागों/एजेंसियों को भारतीय खाद्य निगम के साथ रनिंग रेट संविदा करने का परामर्श दिया जाता है, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के लिए दरें आरक्षित मूल्यों पर तथा उससे ऊपर संविदा की विशिष्ट अवधि के लिए बातचीत करके निर्धारित की जाती है। यदि किसी विभाग/एजेंसी के साथ दर संविदा नहीं होती है तो क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों का निपटान रेट रनिंग संविदा दर, यदि कोई हो, में से उच्चतर दर, पिछली 3 निविदाओं में उच्चतर दर अथवा पिछली निविदा में प्राप्त हुई उच्चतम दर पर किया जाता है।

(ii) निविदा के जरिए निपटान

निविदाओं के जरिए क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों का निपटान आरक्षित मूल्य के ऊपर उच्चतम दर पर किया जाता है।

आरक्षित मूल्य का निर्धारण

क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों की विभिन्न श्रेणियों के निपटान के लिए आरक्षित मूल्य समय-समय पर भारत सरकार (खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग) द्वारा निर्धारित किया जाता है। क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों की विभिन्न श्रेणियों के लिए मौजूदा आरक्षित मूल्य संबंधित जिन्सों के गरीबी रेखा से ऊपर के आवंटन के केन्द्रीय निर्गम मूल्य का निश्चित प्रतिशत है, जो निम्नानुसार है:-
 

(रूपये प्रति क्विंटल)
 

श्रेणी आरक्षित मूल्य क्षतिग्रस्त खाद्यान्न
  चावल गेहूं
चारा श्रेणी-1 622.50 457.50
चारा श्रेणी-2 498.00 366.00
चारा श्रेणी-3 373.50 274.50
औद्योगिक उपयोग 207.50 153.59
खाद 83.00 61.00

सरकार किसी भी समय आरक्षित मूल्य निर्धारित करने के मानदण्ड और उनकी राशि में संशोधन करने के लिए स्वतंत्र है।

क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों की खरीदारी करने के लिए सम्पर्क किया जाने वाला व्यक्ति

आरक्षित मूल्य निर्धारण को छोड़कर क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों के निपटान के संबंध में सभी शक्तियां भारतीय खाद्य निगम के क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधकों के पास उपलब्ध हैं। अत: : संभावित क्रेता भारतीय खाद्य निगम के पास अपना पंजीकरण करा कर, जो भारतीय खाद्य निगम से क्षतिग्रस्त खाद्यान्न की आपूर्ति लेने के लिए नितान्त अपेक्षित है, क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों के निपटान से जुड़े सभी मामलों के लिए संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों में क्षेत्रीय प्रबंधकों से सम्पर्क करें। क्षेत्र में क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों की उपलब्धता के संबंध में सूचना और निपटान आदि के लिए निविदा की निर्धारित समय अनुसूची क्षेत्रीय कार्यालय से अथवा वैबसाइट संख्या ............... से ली जाए।